वेकोलि के (संचालन) तकनीकी निदेशक ग्राउंड ज़ीरो पर पहुंचे वणी क्षेत्र
<p> <big><span [removed] 14.4px;">तकनीकी निदेशक ने अपने इस दौरे में खदान का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ सीधा संवाद करते हुए वेकोलि के कोयला उत्पादन लक्ष्य को हासिल करने हेतु प्रेरित किया।</span></big></p>

NEW DELHI-वेकोलि के निदेशक तकनीकी (संचालन) श्री जे. पी. द्विवेदी ग्राउंड ज़ीरो पर वणी क्षेत्र पहुंचे। यहां उन्होंने मुंगोली खदान के हायर्ड पूर्ण-यंत्रीकृत मोबाईल क्रशर का निरीक्षण किया। मुंगोली खदान से वे पेनगंगा ओपन कास्ट माईन पहुंचे जहाँ उन्होंने 3000 टन प्रति दिन क्षमता के हायर्ड सेमी-मोबाइल क्रशर का उद्घाटन किया।
तकनीकी निदेशक ने अपने इस दौरे में खदान का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ सीधा संवाद करते हुए वेकोलि के कोयला उत्पादन लक्ष्य को हासिल करने हेतु प्रेरित किया।
वणी क्षेत्र की साइडिंग पर उन्होंने वर्तमान कोयला प्रेषण की स्थिति का जायज़ा लिया। साथ ही भविष्य की संभावनाओं के बारे में अधिकारियों से चर्चा की।
उन्होंने वणी क्षेत्र की नायगाव एवं निलजई ओसीएम का दौरा किया और वहाँ के कर्मवीरों का हौसला बढ़ाया। उनके आने से हर तरफ उत्साह एवं जोश का माहौल स्पष्ट दिखाई पड़ रहा था।
इस अवसर पर वणी क्षेत्र के क्षेत्रीय महाप्रबंधक श्री यू. ए. कावले, निदेशक तकनीकी (संचालन) के तकनीकी सचिव श्री आर. के. चौधरी एवं अन्य विभागाध्यक्ष, अधिकारीगण आदि उपस्थित थे।
गौरतलब है कि इस वित्तीय वर्ष के 7 दिन शेष है। हर क्षेत्र द्वारा अपने वार्षिक कोयला उत्पादन लक्ष्य को पूर्ण करने के प्रयास किए जा रहे है। ऐसे में कर्मियों की मेहनत, उनका संकल्प एव आत्मविश्वास अपने चरम पर है।
वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की आठ सहायक कंपनियों में से एक है जो कोयला मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में है।
कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत निगमित कंपनी का पंजीकृत कार्यालय कोल एस्टेट, सिविल लाइंस, नागपुर में है। 15 मार्च 2007 को डब्ल्यूसीएल को मिनीरत्न का दर्जा प्रदान किया गया।
कंपनी ने 2015-16 के दौरान राष्ट्रीय कोयला उत्पादन में लगभग 7.02% का योगदान दिया है। इसका खनन कार्य महाराष्ट्र राज्यों (नागपुर, चंद्रपुर और येओतमाल जिलों में) और मध्य प्रदेश (बैतूल और छिंदवाड़ा जिलों में) में फैला हुआ है।
कंपनी पश्चिमी भारत में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और दक्षिणी भारत में स्थित उद्योगों को कोयले की आपूर्ति का एक प्रमुख स्रोत है।
