NEW DELHI- माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल), एक रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है, जिसकी स्थापना के बाद से नागरिक और रक्षा दोनों क्षेत्रों में लगभग 800 जहाजों के निर्माण और सुपुर्दगी करने की समृद्ध विरासत है। वर्तमान में भारतीय नौसेना के लिए विध्वंसक, फ्रिगेट्स और पनडुब्बियों सहित ये तीन प्रमुख परियोजनाएं यार्ड में निर्माण के विभिन्न चरणों में है। वित्त वर्ष 2021-22 के लिए, शिपयार्ड ने पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 38.5% की वृद्धि दर्शाते हुए 5605 करोड़ रुपये (अनंतिम और अलेखापरीक्षित) का अब तक का सबसे बड़ा कारोबार का रिकॉर्ड दर्ज किया है।
 
यह श्रम प्रधान उद्योग होने के कारण, कोविड-19 महामारी ने शिपयार्ड के संचालन के लिए एक अभूतपूर्व चुनौतिया उत्पन्न की थी। इन सभी बाधाओं के बावजूद एमडीएल ने 2021 के एक कैलेंडर वर्ष में तीन (03) रक्षा प्लेटफार्मों, (02) स्कॉर्पीन सबमरीन और 1 मिसाइल गाइडेड डिस्ट्रॉयर की सुपुर्दगी किया है जो एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। 
 
वित्त वर्ष 2021-22 में एमडीएल ने वित्त वर्ष 2020-21 में 5.41 रुपये प्रति इक्विटी शेयर (वित्त वर्ष 2020-21 के लिए भुगतान किया गया कुल लाभांश 7.24 रुपये प्रति इक्विटी शेयर) की तुलना में 10 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के 7.10 रुपये का अंतरिम लाभांश की घोषणा की है। वित्त वर्ष 2021-22 के लिए अंतिम लाभांश, यदि कोई हो, तो वार्षिक खातों को अंतिम रूप देने के बाद घोषित किया जाएगा। एमडीएल निरंतर प्रॉफिट ट्रैक रिकॉर्ड के साथ एक झिरो-डेब्ट कंपनी है।
 
शिपयार्ड वर्तमान में ‘पी15बी’ के 03 संख्या के विशाखापत्तनम क्लास डिस्ट्रॉयर्स (चार में से एक पहले ही भारतीय नौसना को सुपुर्दगी किया गया), ‘पी17ए’ के 04 संख्या के दो नीलगिरी क्लास एडवांस स्टील्थ फ्रिग्रेट्स, ‘पी75’ की 02 री स्कॉर्पीन क्लास कन्वेंशनल सबमरीन (छह में से चार पहले ही भारतीय नौसेना को सुपुर्दगी की गयी) का निर्माण कर रहा है। इसके अतिरिक्त, एमडीएल पनडुब्बी आईएनएस शिशुमार के मीडियम रिफिट और लाइफ सर्टिफिकेट भी कर रहा है। ये परियोजनाएं 31 मार्च 2022 तक लगभग 45,957 करोड़ रुपये की एमडीएल के लिए आर्डर बुक करने की स्थिति को मजबूती देता है।
 
एक ही दिन में अभूतपूर्व डबल लॉचिंग में, पी15बी परियोजना के 4 जहाज और पी17ए परियोजना के 2 रे पोत को 17 मई 2022 को लॉचिंग करना निर्धारित किया गया है। डिस्ट्रॉयर और फ्रिग्रेट की लॉचिंग और लाइफ साइकल में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और दोनों प्लेटफार्मों को एक बार कमीशन होने के बाद भारतीय नौसेना की नीले पानी की क्षमताओं के लिए शक्तिशाली रूप से अत्याधुनिकता प्रदान करने की परिकल्पना की गई है। एमडीएल एक शिपयार्ड के रूप में देश की समुद्री रक्षा क्षमता को मजबूत करने हेतु महत्वपूर्ण कॉम्बैट ओआरबीएटी प्रदान करने के लिए उत्कृष्टता के साथ अपनी परंपरा को जारी रखता है।
 
शिपयार्ड ने एकीकृत रूप से निर्माण करने के लिए अपने बुनियादी ढांचे और सुविधा का आधुनिकीकरण किया है और इंडस्ट्री 4.0 के कई तकनीकी घटकों को भी लागू किया है, विशेष रूप से उत्पाद डेटा प्रबंधन (पीडीएम)/उत्पाद लाइफ साइकल प्रबंधन (पीएलएम), वर्चुअल रियलिटी लैब (वीआरएल) और निरीक्षण के लिए एग्यूमेंटेड रियलिटी। इन योग्यताओं के साथ, एमडीएल के पास वर्तमान में 10 कैपिटल युद्धपोत और 11 पनडुब्बी के निर्माण करने की कुल क्षमता है।
 
एमडीएल के पास उनकी परिप्रेक्ष्य योजनाओं के आधार पर भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल स्तर की आवश्यकताओं को देखते हुए अच्छे भविष्य के लिए दृष्टिकोण प्रदान करता है। इस संदर्भ में, एमडीएल पी75(आई) की 6 पनडुब्बी के निर्माण के लिए एक मजबूत दावेदार है जो एआईपीएस, न्यू जनरेशन कॉर्वेट्स और न्यू जनरेशन डिस्ट्रॉयर के साथ फिट है। 
 
एमडीएल ने भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के जहाजों और पनडुब्बियों के अलावा वाणिज्यिक जहाजों के लिए अपने मरम्मत और रखरखाव के कार्यक्षेत्र को भी पुनर्जीवित किया है। एमडीएल मेक इन इंडिया पहल के तहत नीशे प्रोडक्ट्स के विनिर्माण के लिए अवसरों की तलाश कर रहा है, जिसकी परिकल्पना तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में हमारी यात्रा को आगे ले जाने के लिए की गई है। 
 
एमडीएल ने हाल ही में कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (कॉनकॉर) के लिए शिपिंग कंटेनरों के निर्माण के लिए डायवर्सिफाइड बिजनेस शुरू किया है, जिसमें महत्वपूर्ण मार्केट पोटेंशियल है।