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<big><span [removed] 14.4px;">एनएचपीसी में, जलविद्युत परियोजनाओं की स्थापना की अवधारणा से लेकर चालू करने तक, सभी गतिविधियां निष्पादित करने की क्षमता है। </span></big></p>
NEW DELHI-नई दिल्ली में माननीय संसदीय राजभाषा समिति ने एनएचपीसी निगम मुख्यालय के साथ निरीक्षण बैठक की। इस दौरान माननीय समिति ने मंत्रालय एवं एनएचपीसी के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में निगम मुख्यालय में हो रहे राजभाषा हिंदी के कार्यों का अवलोकन किया तथा एनएचपीसी में किए जा रहे राजभाषा कार्यों की प्रशंसा की।
वर्तमान में, एनएचपीसी लिमिटेड भारत में जलविद्युत विकास के लिए सबसे बड़ा संगठन है। एनएचपीसी में, जलविद्युत परियोजनाओं की स्थापना की अवधारणा से लेकर चालू करने तक, सभी गतिविधियां निष्पादित करने की क्षमता है।
एनएचपीसी लिमिटेड ने सौर और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में भी विविधीकरण किया है।
वर्तमान में, एनएचपीसी लिमिटेड के पास 24 पावर स्टेशनों से 7071.2 मेगावाट की संस्थापित क्षमता है जिसमे संयुक्त उद्यम के माध्यम से प्राप्त की गई 02 परियोजनाएं शामिल है।
इन परियोजनाओं के निष्पादन के दौरान आने वाली बाधाएं जैसे प्रतिकूल भूवैज्ञानिक परिस्थितियों, कानून व्यवस्था की जटिल समस्याएं, दुर्गम एवं दूरस्थ स्थानों को ध्यान में रखते हुए, अब तक की उपलब्धि सराहनीय है।
वर्तमान में, एनएचपीसी 5999 मेगावाट की कुल संस्थापित क्षमता की 9 परियोजनाओं के निर्माण कार्य में लगी हुई है जिसमें स्वामित्व आधार पर निष्पादित की जा रही 2 जलविद्युत परियोजनाएं अर्थात 2000 मेगावाट की सुबानसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना और 800 मेगावाट की पार्बती- II जलविद्युत परियोजना एवं 40 मेगावाट की सोलर परियोजना, ओड़ीशा और अनुषंगी / संयुक्त उद्यम कंपनियों के माध्यम से निष्पादित की जा रही 6 परियोजनाएं अर्थात 500 मेगावाट की तीस्ता- VI जलविद्युत परियोजना, 1000 मेगावाट की पकल डुल जलविद्युत परियोजना, 850 मेगावाट की रातले जलविद्युत परियोजना, 624 मेगावाट की किरु जलविद्युत परियोजना, 120 मेगावाट की रंगीत-IV जलविद्युत परियोजना और 65 मेगावाट की काल्पी सोलर परियोजना शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, 7342 मेगावाट कुल क्षमता की 8 परियोजनाएं मंजूरी चरण के अंतर्गत हैं, जिसमें एनएचपीसी की स्वयं की 5 परियोजनाएं तथा 3 संयुक्त उद्यम की माध्यम परियोजनाएं शामिल हैं।