ऊर्जा मंत्रालय ने दिया राष्ट्रीय हाइड्रोजन ऊर्जा मिशन की स्थापना का प्रस्ताव
<div> <big>प्रायोगिक परियोजनाओं की सफलता के आधार पर गैस आधारित डीआरआई इकाइयों को इस प्रक्रिया को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।</big></div> <div> </div>

NEW DELHI- नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने हरित हाइड्रोजन उत्पादन तकनीक को विकसित करने और उसका विस्तार करने, इसे वहनीय और व्यापक रूप से सुलभ बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय हाइड्रोजन ऊर्जा मिशन की स्थापना का प्रस्ताव दिया है।
इस मिशन में इस्पात क्षेत्र को भी हितधारक बनाया गया है। इस पहल के तहत, गैस आधारित डीआरआई संयंत्रों में प्राकृतिक गैस को आंशिक रूप से एच 2 से बदलकर, डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (डीआरआई) उत्पादन में ग्रीन एच 2 का उपयोग करने की व्यवहार्यता का पता लगाने के लिए सरकार से आंशिक वित्त पोषण के साथ पायलट प्लांट स्थापित करने का प्रस्ताव किया गया है।
प्रायोगिक परियोजनाओं की सफलता के आधार पर गैस आधारित डीआरआई इकाइयों को इस प्रक्रिया को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
ग्रीन एच 2 अक्षय ऊर्जा से उत्पादित बिजली का उपयोग करके पानी के इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा उत्पादित किया जाता है। ग्रीन एच 2 वर्तमान में व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य नहीं है।
हालांकि, अक्षय ऊर्जा उत्पादन और इलेक्ट्रोलाइज़र की घटती लागत के साथ, भविष्य में हरित हाइड्रोजन का उत्पादन लागत प्रतिस्पर्धी बनने की संभावना है।
यह जानकारी केंद्रीय इस्पात मंत्री श्री राम चंद्र प्रसाद सिंह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
