NEW DELHI- श्री पी राधा कृष्ण, निदेशक (उत्पादन) और मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी (सीआईएसओ) द्वारा 01 जून 2022 को संबोधित साइबर जागृता (जागरूकता) दिवस (सीजेडी) उद्घाटन किया गया। बीडीएल की अन्य सभी इकाइयां वीडियो कॉन्फ्रेंस (वीसी) के माध्यम से सत्र में शामिल हुईं।
 
सीजेडी हर महीने के पहले बुधवार को मनाया जाएगा। साइबर सुरक्षा पर सभी कर्मचारियों को जागरूकता पैदा की जाएगी। साइबर सुरक्षा पर विभिन्न विषयों को शामिल करते हुए वार्षिक कार्य योजना तैयार की जाती है।
 
हैदराबाद आधारित मुख्यालय सहित भारत डायनामिक्‍स लिमिटेड की स्‍थापना दि. 16 जुलाई, 1970 को एक सार्वजनिक उपक्रम में रूप में भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन की गयी थी। भारतीय सशस्त्र सेनाओं के लिए संचलित प्रक्षेपास्‍त्र प्रणाली व इनसे जुड़े रक्षा उपकरण बनाने का आधार-पीठ तैयार करने की दृष्‍टि से स्थापित किया गया था।
 
अपनी स्थापना के समय से बी डी एल, डी आर डी ओ और विदेशी मूल विनिर्माणकर्ता (ओ ई एम) के साथ मिलकर तीनों सेनाओं के लिए विभिन्‍न प्रकार की मिसाइल व इनसे जुड़े उपकरण तैयार कर देता आ रहा है।  
 
एकीकृत संचलित प्रक्षेपास्‍त्र विकास कार्यक्रम (IGMDP) के माध्यम से देशी तौर पर अत्याधुनिक व नयी मिसाइलें बनाने की दिशा में राष्‍ट्र द्वारा की गयी पहल से बी डी एल को इस कार्यक्रम में सक्रिय भागीदार बनने का अवसर मिला। 
 
इस मिसाइल कार्यक्रम के तहत बी डी एल की पहचान प्रमुख उत्‍पादन एजेंसी के रूप में की गयी। इससे उन्नत मिसाइल विनिर्माण और इसके कार्यक्रम प्रबंधन प्रौद्योगी व कौशल को आत्मसात करने के काफी अवसर प्राप्त हुए। 
 
‘आत्‍मनिर्भर भारत’ के संबंध में भारत सरकार द्वारा की गयी घोषणाओं से भारतीय रक्षा उद्योग को कई अवसर प्राप्‍त हुये जिनसे आने वाले वर्षों में आत्‍मनिर्भर भारत के निर्माण में सुगमता होगी। ‘आत्‍मनिर्भर भारत’ की पहल के तहत इसे और सुदृढ़ बनाते हुए बी डी एल ने कई कदम उठाये हैं। 
 
इसके अंतर्गत – ‘सीकर निर्मिति केंद्र’, ‘वारहेड उत्‍पादन केंद्र’ का निर्माण, बी डी एल की ओर से पूर्णत: देशी रूप से डिज़ाइन कर तैयार किये गये उपकरण – कांकूर्स मिसाइल परीक्षण उपकरण और कांकूर्स लाँचर परीक्षण उपकरण का उद्घाटन हाल ही में किया गया है। 
 
इनके साथ-साथ बी डी एल परिसर में ही सतहधारी प्रतिष्‍ठापन प्रौद्योगिकी सुविधा, उन्‍नत निष्‍पादन संगणन सुविधा, देशीकरण के लिये चुनी गयी वस्‍तुओं के लिए ई ओ आई (EoI) जारी करना आदि भी कार्य किये गये हैं। इन प्रयासों से न केवल ‘आत्‍मनिर्भर भारत’ अभियान वास्तविकता का रूप धारण करेगा बल्कि राष्ट्र के लिए बड़ी मात्रा में बहुमूल्‍य विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी।