कोरोना काल और लॉकडाऊन के उबाऊपन से उभारने के लिए क्रिकेट में मनोचिकित्सक या फिर माइंड कोच की जरूरत ज्यादा महसूस की जा रही है। जिनमें विराट कोहली, एबी डीविलयर्स, युजवेंदर चहल, ग्लेन मैक्सवेल जैसे क्रिकेटरों के मनोबल को ऊंचा बढ़ाने कों लेकर आरसीबी मेनेजमेंट गंभीरता से काम कर रहा है। हालाकि सचिन तेंदुलकर हों या फिर राहुल द्रविड या वेस्टइंडीज पेस बैटरी के खिलाफ रनों से जूझ रहे दिग्गज ऑस्ट्रेसियाई ग्रेग चैपल, इन सभी ने थोड़े समय के लिए कभी न कभी मनोचिकित्सक का सहारा जरूर लिया है। यह सच्चाई है कि ओलंपिक खेलों की तरह क्रिकेट में मनोचिकित्सक या फिर माइंड कोच की जरूरत ज्यादा महसूस नहीं की गई, लेकिन कोरोना काल में बायो बबल में चल रहे क्रिकेट ने टीमों को इस दिशा में सोचने पर मजबूर कर दिया है।
क्रिकेटरों के साथ काम करना होगी चुनौती
खिताब को तरस रही आरसीबी इस आईपीएल में अपने क्रिकेटरों को किसी तरह की दिक्कत परेशानी नहीं आने देना चाहती है, जिसके चलते उसने संजना की सेवाएं ली हैं। संजना मीडिया के समक्ष खुलासा करती हैं कि आरसीबी के क्रिकेटरों के साथ काम करना उनके लिए नई चुनौती होगी। खासतौर पर क्रिकेटरों के साथ बतौर माइंड कोच काम काफी अलग होगा। देश में क्रिकेट एक धर्म की तरह है जिसके चलते सेलिब्रिटी बने क्रिकेटरों के लिए मैदान पर अपने प्रदर्शन को बनाकर रखना चुनौती भरा काम होता है।



नहीं किया प्लान का खुलासा
संजना यह खुलासा नहीं करती हैं कि वह क्रिकेटरों के साथ किस तरह से काम करने जा रही हैं लेकिन वह यह मानती हैं अपने सेलिब्रिटी स्टेटस को लेकर क्रिकेटर भी दबाव में रहते हैं। इस दबाव में कहीं न कहीं उनका प्रदर्शन भी प्रभावित होता है। क्लीनिकल साइकोलॉजी के बाद सिंगापुर से स्पोट्र्स साइकोलॉजी करने वाली संजना अमेरिका, सिंगापुर समेत सात देशों के एथलीटों के साथ काम कर चुकी हैं।

(Anjul Tyagi)