आचार्य सौभाग्य सागर जी महाराज ने कहा कि आज का मनुष्य आधुनिकता के पीछे भाग रहा है अनेकों विभिन्न रोगों एवं धन हानि से क्षोभ आदि व्याकुलता के कारण मानसिक संतुलन खोता जा रहा है।

आत्मानुभव से बहुत दूर कुदेवों से अपने अनन्त दुखों के छुटकारा पाने की भीख मांग रहा हैै जिससे समाज को बचाना भी एक धर्म का अंग मानता हॅू। सोलह कारण भावनाओं में प्रवचन वात्सल्य नाम का एक अंग है उसका पालन करते हुये अपने प्रवचनों से आप सभी को वात्सल्य भाव द्वारा यह समझाता हूॅ कि अपने सुख दुख के आप ही स्वयं कर्ता है जो कर्म आपने पूर्व समय में किये है उसी के अनुसार भोगना प? रहा है।

अशुभ कर्म के उदय में आने से दुखों का पिटारा खुल गया है इसका निवारण करने के लिये पुन: आपको शुभ कर्म करने होगे अपने आचरण में परिवर्तन लाना होगा जिससे मन शुभ कर्मों को करने में बाध्य हो जाये।

महामृत्युंजय 108 कुण्डीय महायज्ञ में श्रद्धालू देगें आहूतियां आचार्य सौभाग्य सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में बद्री प्रसाद की बगिया में 17 मार्च से 22 मार्च तक चल रहे महामृत्युंजय जनकल्याण मंत्रानुष्ठान एवं 108 कुण्डीय विश्व शांति महायज्ञ में सोमवार को प्रात: काल 6 बजकर 35 मिनिट पर 108 कुण्डीय महायज्ञ का आयोजन किया जायेेगा।

(Anjul Tyagi)